🎯Revision Notes — Class 7 Science, Chapter 4: Heat (ऊष्मा)
पूरी किताब स्तरीय — step by step हिंदी में, सरल और संक्षिप्त — साथ में MCQs (उत्तर सहित)
1) परिचय — ऊष्मा क्या है?
-
ऊष्मा (Heat): एक प्रकार की ऊर्जा है जो किसी वस्तु के तापमान को बढ़ाती है या काम कराती है।
-
तापमान (Temperature): किसी वस्तु की ठंडक/गर्माहट नापने की संख्या। वह माप है, ऊष्मा का नहीं।
-
तापमान नापने वाला उपकरण: थर्मामीटर (Thermometer)।
-
सामान्य इकाई: डिग्री सेल्सियस (°C)।
-
2) तापमान और ऊष्मा में अंतर
-
ऊष्मा — ऊर्जा का रूप, बहती है (हॉट → ठंडी)।
-
तापमान — किसी वस्तु की औसत कणीय ऊर्जा का माप।
-
उदाहरण: एक बर्तन में गरम पानी में ऊष्मा अधिक है; पर बर्तन और पानी के अलग-अलग तापमान हो सकते हैं।
3) तापमान नापने के साधन
-
डायरेक्ट थर्मामीटर: मर्करी/एल्कोहल थर्मामीटर।
-
क्लिनिकल थर्मामीटर: मानव शरीर का ताप नापने के लिए।
-
प्रयोग रिकॉर्ड करते समय ध्यान: थर्मामीटर को सही तरीके से रखें, पढ़ाई आँखों के समतल पर करें, वायु के प्रभाव से बचें।
4) ऊष्मा का प्रभाव (Effects of Heat)
-
आयतन परिवर्तन (Expansion)
-
ठोस, द्रव और गैस गर्म होने पर बढ़ते हैं (विस्तार) और ठंडे होने पर सिकुड़ते हैं (संकुचन)।
-
ठोस में वृद्धि सबसे कम, गैस में सबसे अधिक।
-
उदाहरण: गर्म लोहे की रेलें — बीच में गैप रखें ताकि विस्तार हो सके।
-
-
रेखीय विस्तार (Linear expansion) — लंबाई बढ़ना (छड़ी आदि)।
-
आयामी/खंडीय विस्तार (Volume expansion) — ठोस/तरल का कुल आयतन बढ़ना।
-
परिवर्तन अवस्था (Change of state)
-
ठोस → द्रव (पिघलना) : मेल्टिंग (Melting)
-
द्रव → गैस (वाष्पीकरण/उबलना) : Evaporation/Boiling
-
गैस → द्रव (संघनन) : Condensation
-
द्रव → ठोस (जमना) : Freezing/Solidification
-
-
रसायनिक व भौतिक परिवर्तन — कुछ रसायन ऊष्मा से बदलते हैं (जैसे, कागज़ जलना)।
5) ऊष्मा का संचरण (Modes of Heat Transfer)
-
चालन (Conduction)
-
ठोस माध्यम में कणों द्वारा पास-पास टकराकर ऊर्जा का स्थानांतरण।
-
अच्छे चालक (conductors): धातुएँ (लोहे, तांबा) — तेज़ चालन।
-
अच्छे इन्सुलेटर (insulators): लकड़ी, प्लास्टिक, हवा, हवा से भरे कपड़े — धीमा चालन।
-
प्रयोग: लोहे के चम्मच का एक सिरा गर्म करने पर दूसरा सिरा भी गरम होता है।
-
-
संवहन (Convection)
-
द्रव और गैस में गर्म भाग हल्का होकर ऊपर उठते हैं और ठंडा भाग नीचे आता है, जिससे सर्कुलेशन बनता है।
-
उदाहरण: पानी का गरम होना, समुद्री हवा/लॉकेल ब्रीज।
-
-
रेडिएशन / विकिरण (Radiation)
-
किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं; तरंगों (इन्फ्रारेड) द्वारा स्थानांतरण।
-
उदाहरण: सूर्य की गर्मी, आग से आने वाली ऊष्मा।
-
गर्म वस्तुएँ इन्फ्रारेड ऊर्जा उत्सर्जित करती हैं।
-
नोट: रोजमर्रा में ऊष्मा का संचरण अक्सर इन तीनों का मिश्रण होता है।
6) ऊष्मा संचरण के प्रयोग/प्रमाण
-
चालन का प्रयोग: धातु की छड़ को एक सिरे पर गर्म करें — गर्मी धीरे-धीरे दूसरे सिरे तक पहुँचेगी।
-
संवहन का प्रयोग: पानी को गरम करने पर ऊपर की परतें उभर कर जाती हैं — convection currents बनते हैं।
-
रेडिएशन का प्रयोग: हाथ को आग के पास रखें — बिना किसी माध्यम के ऊष्मा लगेगी।
7) इन्सुलेशन (Heat Insulation) — ऊष्मा रोकना/बचाना
-
इन्सुलेटर का उपयोग घरों, थर्मस, कपड़ों में होता है।
-
उदाहरण: ऊन के कपड़े, थर्मस की डबल वॉल, दीवारों में फोम, वूल/बेडशीट।
-
ठंडा रखने के लिए भी ये तकनीकें काम आती हैं (ऊष्मा बाहर जाने न पाये)।
8) विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat) — संक्षेप में
-
किसी पदार्थ की 1 kg मात्रा का तापमान 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा। (कक्षा 7 में परिचय मात्र; गणना आमतौर पर कक्षा 8-9 में आता है।)
9) ऊर्जा संरक्षण व उपयोगी अनुप्रयोग
-
ऊर्जा बचाने के उपाय: मध्यम ताप पर रसोई, कुशल स्टोव, डबल ग्लेज़िंग, गर्म पानी के लिए सोलेर कलेक्टर।
-
रोजमर्रा के अनुप्रयोग: तवा, पंखे, हीटर, चमकदार कपड़े गर्मियों में रिफ्लेक्ट करते हैं (धूप कम लगती है)।
10) महत्वपूर्ण प्रयोग (Step-by-step सरल प्रयोग जो आप क्लास/लैब में कर सकते हैं)
प्रयोग 1: चालन का प्रमाण (Loha chammach experiment)
-
एक लंबा धातु चम्मच लें।
-
चम्मच के एक सिरे को आग/ब्यूचरलाइट पर गरम करें।
-
कुछ मिनट बाद दूसरे सिरे को छूकर महसूस करें — गर्मी पहुँचती है।
निष्कर्ष: धातु अच्छे चालक हैं।
प्रयोग 2: संवहन का प्रदर्शन (Convection with colored water)
-
पानी को बर्तन में भरें और थोड़ा रंग (ink/food color) डालें निचले हिस्से पर।
-
नीचे से गर्म करें और ऊपर उठते रंग को देखें — convection currents दिखेंगे।
प्रयोग 3: विकिरण का प्रदर्शन
-
दो समान पत्र रखें — एक पर काला रंग लगाएँ, दूसरे पर सफेद।
-
उन्हें सूरज/लैम्प के नीचे रखें। काला ताप तेज़ से बढ़ेगा — काली सतह रेडिएशन अधिक सोखती है।
11) महत्वपूर्ण शब्दावली (Key Terms)
-
ऊष्मा, तापमान, थर्मामीटर, चालन, संवहन, विकिरण, विस्तार/संकुचन, इन्सुलेटर, कंडक्टर, कोकिंग/बायलिंग, पिघलना, जमना, वाष्पीकरण।
12) Quick Revision — One-page summary
-
ऊष्मा = ऊर्जा, तापमान = माप।
-
संचरण के तीन तरीके: चालन (solids), संवहन (liquids & gases), विकिरण (no medium)।
-
गर्म होने पर सभी पदार्थ फैलते हैं; ठंडे होने पर सिकुड़ते हैं।
-
इन्सुलेटर = हवा, लकड़ी, प्लास्टिक; कंडक्टर = धातु।
-
प्रयोग: चम्मच (conduction), पानी में रंग (convection), काले- सफेद पत्र (radiation)।
13) अभ्यास हेतु MCQs (उत्तर सहित)
-
गर्मी की ऊर्जा को मापने का उपकरण क्या नहीं है?
A) थर्मामीटर B) जेलोस्कोप C) थर्मोग्राफ D) क्लिनिकल थर्मामीटर
उत्तर: B -
ऊष्मा का संचरण किसे कहते हैं?
A) किसी वस्तु का झिलमिलाना B) ऊर्जा का स्थानांतरण C) रंग बदलना D) द्रव का जमना
उत्तर: B -
चालन किस माध्यम में सबसे अधिक प्रभावी है?
A) गैस B) द्रव C) ठोस D) निर्वात
उत्तर: C -
कौन सा पदार्थ अच्छा इन्सुलेटर है?
A) तांबा B) शीशा C) लकड़ी D) लोहे
उत्तर: C -
वाष्पीकरण किस अवस्था परिवर्तन का उदाहरण है?
A) ठोस → द्रव B) द्रव → गैस C) गैस → ठोस D) द्रव → ठोस
उत्तर: B -
डबल दीवार वाले थर्मस में मध्य में क्या भरा होता है?
A) पानी B) हवा/वैक्यूम C) लोहे के टुकड़े D) मिट्टी
उत्तर: B -
सूर्य से आने वाली ऊष्मा का मुख्य रूप कौन-सा है?
A) चालन B) संवहन C) विकिरण D) रिफ्लेक्शन
उत्तर: C -
गर्म होने पर सबसे अधिक फैलने वाले कण होते हैं:
A) ठोस B) द्रव C) गैस D) काँच
उत्तर: C -
थर्मामीटर में अक्सर कौन-सा द्रव प्रयोग होता है?
A) तेल B) पानी C) मरकरी (पारा) या रंगीन अल्कोहल D) कच्चा तंबाकू
उत्तर: C -
समुद्र तट पर दिन और रात में हवा के चलने का कारण है:
A) चालन B) संवहन C) विकिरण D) गुरुत्वाकर्षण
उत्तर: B -
किस प्रकार का विस्तार रॉड की लंबाई बढ़ने से संबंधित है?
A) रेखीय विस्तार B) आयतन विस्तार C) सतही विस्तार D) कोई नहीं
उत्तर: A -
काले रंग की सतह और सफेद सतह में से कौन ज्यादा विकिरण सोखती है?
A) सफेद B) काला C) दोनों बराबर D) रंग से संबंध नहीं
उत्तर: B -
उबलते पानी में बुलबुले बनते हैं क्योंकि:
A) हवा निकलती है B) पानी ध्वनि करता है C) पानी गैस बनकर उभरता है D) रंग बदलता है
उत्तर: C -
जमे हुए पानी को पिघलाने के लिए कौन-सा प्रभाव काम में आता है?
A) संवहन B) चालन C) विकिरण D) ऊष्मा का प्रयोग
उत्तर: D (ऊष्मा का प्रयोग — पर अधिक सटीक: चालन/विकिरण/संवहन किसी भी माध्यम से संभव) -
किसे कहा जाता है — “ऊष्मा का माध्यम की आवश्यकता नहीं”?
A) चालन B) संवहन C) विकिरण D) इन्सुलेशन
उत्तर: C -
गैसों में विस्तार सबसे अधिक होता है क्योंकि:
A) कण निकट हैं B) कण स्वतंत्र और दूर हैं C) कण जुड़े हुए हैं D) कण नहीं होते
उत्तर: B -
घर के ठंडे कमरे में गर्म हवा ऊपर क्यों जाती है?
A) गुरुत्वाकर्षण से B) गर्म हवा हल्की होती है इसलिए ऊपर उठती है (संवहन) C) हवा में पानी अधिक होता है D) बिजली से
उत्तर: B -
कौन-सा पदार्थ ऊष्मा का सबसे अच्छा चालक है?
A) प्लास्टिक B) काँच C) तांबे D) लकड़ी
उत्तर: C -
पानी के उबलने का तापमान (सामान्य दाब पर) लगभग कितना होता है?
A) 0°C B) 50°C C) 100°C D) 212°C
उत्तर: C (100°C; 212°F बराबर) -
इन्सुलेटर का उपयोग किसलिए होता है?
A) ऊष्मा बढ़ाने के लिए B) ऊष्मा को रोकने/बचाने के लिए C) रंग बदलने के लिए D) ध्वनि फैलाने के लिए
उत्तर: B
14) Short Answer Questions (तुरंत उत्तर देने के लिए)
-
चालन क्या है? — कणों के टकराने से ऊर्जा का हस्तांतरण।
-
संवहन क्या है? — द्रव/गैस के बहने से ऊष्मा का स्थानांतरण।
-
विकिरण क्या है? — बिना माध्यम के तरंगों द्वारा ऊष्मा का स्थानांतरण।
-
उदाहरण लिखिए जहाँ इन्सुलेटर का उपयोग होता है। — थर्मस, घर की छत पर फोम, ऊनी कपड़े।
-
किस पदार्थ का विस्तार सबसे अधिक होता है? — गैस।
1.1 परिचय
सर्दियों में जब बाहर ठंड होती है, तो हम ऊनी कपड़े पहनते हैं। ऊनी कपड़े हमें गर्म रखते हैं। गर्मी होने पर हम हल्के रंग के सूती कपड़े पहनना पसंद करते हैं। ये हमें ठंडक का एहसास देते हैं। हमारे आस-पास कई वस्तुएँ हैं जिन्हें उनके तापमान के आधार पर गर्म या ठंडी वस्तुओं में वर्गीकृत किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, चाय गर्म होती है जबकि बर्फ ठंडी होती है।
1.2 तापमान मापना
किसी वस्तु की गर्मी की मात्रा उसके तापमान से मापी जाती है। थर्मामीटर एक उपकरण है जो किसी वस्तु का तापमान मापता है। हमारे शरीर का तापमान मापने वाले थर्मामीटर को क्लिनिकल थर्मामीटर कहते हैं। क्लिनिकल थर्मामीटर चित्र 1.1 में दिखाए गए थर्मामीटर जैसा दिखता है।
(i) सेल्सियस पैमाना (C): सेल्सियस पैमाने की निचली सीमा 0°C है जबकि ऊपरी सीमा 100°C मानी जाती है।
(ii) फ़ारेनहाइट पैमाना (F): फ़ारेनहाइट पैमाने की निचली सीमा 32°F है जबकि ऊपरी सीमा 212°C है।
(iii) केल्विन पैमाना (K): केल्विन पैमाने की निचली सीमा 273.15° K है जबकि ऊपरी सीमा 373.15° K है।
विभिन्न पैमानों के बीच संबंध:
(i) C/5 F-32/9 (ii) K = C + 273.15
नोट:
(i) निचली सीमा और ऊपरी सीमा किसी भी तापमान मापक पैमाने के दो निश्चित बिंदु हैं।
(ii) एक चिकित्सीय थर्मामीटर 35°C से 42°C तक का तापमान मापता है।
1.3 थर्मामीटर पढ़ना
आइए सीखें कि थर्मामीटर कैसे पढ़ा जाता है। थर्मामीटर को धोएँ, बेहतर होगा कि किसी एंटीसेप्टिक घोल से धोएँ। इसे मजबूती से पकड़ें और कुछ झटके दें। झटके देने से पारे का स्तर नीचे आ जाएगा। सुनिश्चित करें कि यह 35°C से नीचे आ जाए। अब थर्मामीटर के बल्ब को अपनी जीभ के नीचे रखें। एक मिनट बाद, थर्मामीटर को बाहर निकालें और रीडिंग नोट करें।
मानव शरीर का सामान्य तापमान 37°C या 98.4°F होता है। हर व्यक्ति का तापमान 37°C नहीं हो सकता। यह थोड़ा ज़्यादा या थोड़ा कम हो सकता है। दरअसल, जिसे हम सामान्य तापमान कहते हैं, वह कई स्वस्थ व्यक्तियों के शरीर का औसत तापमान होता है।
ऊष्मा स्थानांतरण के तीन तरीके हैं। ये हैं: चालन, संवहन और विकिरण।
चालन: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा किसी वस्तु के गर्म सिरे से ठंडे सिरे तक ऊष्मा स्थानांतरित होती है, चालन कहलाती है।
ठोस पदार्थों में, सामान्यतः ऊष्मा का स्थानांतरण चालन प्रक्रिया द्वारा होता है।
दिन के समय, स्थल जल की तुलना में तेज़ी से गर्म होता है। स्थल के ऊपर की हवा गर्म होकर ऊपर उठती है। समुद्र से आने वाली ठंडी हवा उसकी जगह लेने के लिए स्थल की ओर तेज़ी से आती है। स्थल से आने वाली गर्म हवा इस चक्र को पूरा करने के लिए समुद्र की ओर बढ़ती है। समुद्र से आने वाली हवा को समुद्री समीर कहते हैं। जल स्थल की तुलना में धीरे-धीरे ठंडा होता है। इसलिए, स्थल से आने वाली ठंडी हवा समुद्र की ओर बढ़ती है। इसे स्थलीय समीर कहते हैं।
चालक: वे पदार्थ जो ऊष्मा को अपने से आसानी से गुजरने देते हैं, ऊष्मा के चालक कहलाते हैं। उदाहरण: एल्युमीनियम, लोहा और ताँबा।
कुचालक: वे पदार्थ जो ऊष्मा को अपने से होकर नहीं गुजरने देते, ऊष्मा के कुचालक कहलाते हैं। उदाहरण: प्लास्टिक और लकड़ी।
1.7 ऊष्मागतिक प्रक्रियाएँ
i) समतापी प्रक्रिया: वह प्रक्रिया जिसमें निकाय का तापमान स्थिर रहता है, समतापी प्रक्रिया कहलाती है।
ii) रुद्धोष्म प्रक्रिया: वह प्रक्रिया जिसमें निकाय में न तो कोई ऊष्मा प्रवेश करती है और न ही निकाय से बाहर निकलती है, रुद्धोष्म प्रक्रिया कहलाती है, अर्थात निकाय की ऊष्मा स्थिर रहती है।
iii) समदाबीय प्रक्रिया: वह प्रक्रिया जिसमें निकाय का दाब स्थिर रहता है, समदाबीय प्रक्रिया कहलाती है।
iv) समआयतन प्रक्रिया: वह प्रक्रिया जिसमें आयतन स्थिर रहता है, समआयतन प्रक्रिया कहलाती है।
1.8 ऊष्मा के प्रभाव:
i) ऊष्मा किसी पदार्थ के तापमान में परिवर्तन का कारण बनती है।
ii) ऊष्मा पदार्थ के प्रसार को प्रेरित कर सकती है। यह प्रसार पदार्थ की लंबाई, क्षेत्रफल या आयतन में हो सकता है।
⇒ रैखिक प्रसार: गर्म करने पर पदार्थ की लंबाई में प्रसार।
⇒ सतही प्रसार: गर्म करने पर पदार्थ के क्षेत्रफल में प्रसार।
⇒ घनाकार प्रसार: गर्म करने पर पदार्थ के आयतन में प्रसार। iii) ऊष्मा पदार्थ की अवस्था को बदल सकती है।
द्रव -----घूर्णन-----> गैस (वाष्पीकरण)
ठोस -----घूर्णन-----> द्रव (संलयन या गलन)
ठोस -----घूर्णन-----> गैस (ऊर्ध्वपातन)
नोट: ठोस को मध्यवर्ती द्रव अवस्था से गुजरे बिना गर्म करके सीधे गैस में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को ऊर्ध्वपातन कहते हैं।
⇒ गैसों को मध्यवर्ती द्रव अवस्था से गुजरे बिना सीधे ठोस में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को हिमीकरण कहते हैं।
⇒ सामान्य परिस्थितियों में ऊष्मा सदैव उच्च तापमान से निम्न तापमान की ओर प्रवाहित होती है।
⇒ रेफ्रिजरेटर के अंदर, बाह्य कार्य द्वारा ऊष्मा निम्न तापमान से उच्च तापमान की ओर प्रवाहित होती है।
a.) तापमान b.) थर्मामीटर
c.) ऊष्मा का चालक d.) ऊष्मा का कुचालक।
उत्तर: a.) तापमान किसी वस्तु की गर्मी और ठंडक की मात्रा का माप है। {नोट: तापमान का S.I मात्रक केल्विन है। अन्य मात्रक डिग्री सेल्सियस और डिग्री फ़ारेनहाइट हैं}
b.) थर्मामीटर तापमान मापने के लिए प्रयुक्त एक उपकरण है।
c.) वे पदार्थ जो ऊष्मा को आसानी से अपने से होकर गुजरने देते हैं, ऊष्मा के चालक कहलाते हैं। उदाहरण: लोहा, एल्युमीनियम, ताँबा आदि।
d.) वे पदार्थ जो ऊष्मा को आसानी से अपने से होकर नहीं गुजरने देते, ऊष्मा के कुचालक कहलाते हैं।
उदाहरण: प्लास्टिक, लकड़ी आदि।
{नोट: जल और वायु ऊष्मा के कुचालक हैं।}
प्रश्न 2. I.) क्लिनिकल थर्मामीटर क्या है?
ii.) इस थर्मामीटर में प्रयुक्त द्रव का नाम बताइए।
iii.) इस थर्मामीटर का परास क्या है?
उत्तर: I.) हमारे शरीर का तापमान मापने वाले थर्मामीटर को क्लिनिकल थर्मामीटर कहते हैं।
ii.) पारा।
iii.) 35°C से 42°C तक।
{नोट: पारा एक ज़हरीली धातु है। अगर थर्मामीटर मुँह में रखने पर टूट जाए, तो
पारे के संपर्क में आ जाता है। इससे निपटने के लिए आजकल डिजिटल थर्मामीटर का इस्तेमाल किया जाता है।}
प्रश्न 3. स्वस्थ मानव शरीर का सामान्य तापमान कितना होता है?
उत्तर: 37°C।
प्रश्न 4. प्रयोगशाला थर्मामीटर का परास क्या होता है?
उत्तर: - 10°C से 110°C तक।
प्रश्न 5. हम अपने शरीर का तापमान मापने के लिए प्रयोगशाला थर्मामीटर का उपयोग नहीं कर सकते। क्यों?
उत्तर: प्रयोगशाला थर्मामीटर में कोई 'किन्क' नहीं होता। इसलिए जैसे ही हम थर्मामीटर को मुँह से निकालेंगे, तापमान गिर जाएगा और हम शरीर का सही तापमान नहीं माप पाएँगे।
प्रश्न 6. क्लिनिकल थर्मामीटर में 'किन्क' का क्या उपयोग है?
उत्तर: क्लिनिकल थर्मामीटर में 'किंक' (घुमाव) होता है जो पारे को अपने आप नीचे नहीं आने देता और हम कुछ समय बाद भी मापा गया तापमान नोट कर सकते हैं।
प्रश्न 7. थर्मामीटर में पारे का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर: थर्मामीटर में पारे का उपयोग निम्नलिखित कारणों से किया जाता है:
i) यह केशिका नली की दीवारों से चिपकता नहीं है।
ii) इसकी चांदी जैसी चमक हमें तापमान को सटीक रूप से देखने में मदद करती है।
iii) इसका प्रसार एकसमान होता है।
iv) यह आसानी से वाष्पीकृत नहीं होता है।
प्रश्न 8. निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए कारण बताइए:
a.) खाना पकाने के बर्तन धातुओं से बने होते हैं।
b.) खाना पकाने के बर्तनों और चाय की केतली में लकड़ी और एबोनाइट से बने हैंडल लगे होते हैं।
c.) गर्मियों में हल्के रंग के कपड़े और सर्दियों में गहरे रंग के कपड़े अधिक उपयुक्त होते हैं।
d.) ऊनी कपड़े हमें सर्दियों में गर्म रखते हैं।
e) खाना पकाने के बर्तन का निचला भाग काले रंग से रंगा होता है।
उत्तर: a.) खाना पकाने के बर्तन धातुओं से बने होते हैं। अच्छे चालक होने के कारण, ये बहुत जल्दी गर्म हो जाते हैं और इसलिए कम समय में खाना पक जाता है।
b) लकड़ी और एबोनाइट ऊष्मा के कुचालक होते हैं, इसलिए इनका हैंडल गर्म नहीं होता और हम गर्म बर्तन को आराम से पकड़ सकते हैं।
c) गर्मियों में सफेद या हल्के रंग के कपड़े ज़्यादा उपयुक्त होते हैं क्योंकि ये सूर्य की ऊष्मा को बहुत कम अवशोषित करते हैं और हमारे शरीर को ठंडा रखते हैं। जबकि काले या गहरे रंग के कपड़े सर्दियों में उपयुक्त होते हैं क्योंकि ये सूर्य की अधिकांश विकिरण ऊष्मा को अवशोषित करते हैं और हमें गर्म रखते हैं।
d) ऊन ऊष्मा का कुचालक होता है। इसके अलावा, ऊन के रेशों के बीच हवा फँसी होती है। यह हमारे शरीर से आसपास के वातावरण में ऊष्मा के प्रवाह को रोकती है। इसलिए हमें गर्मी महसूस होती है।
e) जिससे यह अधिक ऊष्मा अवशोषित करता है और कम समय में खाना पक जाता है।
प्रश्न 9. मान लीजिए आपको सर्दियों में एक मोटे कंबल या दो पतले कंबलों को एक साथ जोड़कर इस्तेमाल करने का विकल्प दिया जाता है। आप क्या चुनेंगे और क्यों?
उत्तर: हम दो पतले कम्बलों को आपस में जोड़ना पसंद करते हैं क्योंकि दोनों कम्बलों के बीच फँसी हवा एक कुचालक का काम करती है और शरीर की ऊष्मा को बाहर नहीं निकलने देती।
प्रश्न 10. ऊष्मा स्थानांतरण की तीन प्रक्रियाओं के नाम बताइए और उनकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर: चालन, संवहन और विकिरण ऊष्मा स्थानांतरण की तीन प्रक्रियाएँ हैं। चालन: यह ठोस पदार्थों में ऊष्मा स्थानांतरण की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में ठोस के अणु अपनी स्थिति से हिले बिना ऊष्मा को एक से दूसरे में स्थानांतरित करते हैं।